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Article: तेलियुक्त और मुँहासे वाली त्वचा के लिए स्लगिंग: भारत में भारी ऑक्लूसिव के बिना नमी लॉक करने का सही तरीका

तेलियुक्त और मुँहासे वाली त्वचा के लिए स्लगिंग - Hindi - Quench Botanics
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तेलियुक्त और मुँहासे वाली त्वचा के लिए स्लगिंग: भारत में भारी ऑक्लूसिव के बिना नमी लॉक करने का सही तरीका

तेलियुक्त और मुँहासे वाली त्वचा के लिए स्लगिंग: भारत में नमी लॉक करने का सही तरीका

तेलियुक्त और मुँहासे वाली त्वचा के लिए स्लगिंग: भारत में नमी लॉक करने का सही तरीका

चेहरे पर चिपचिपी क्रीम लगाने और सुबह उठकर चमकदार 'ग्लास स्किन' पाने का ट्रेंड, जिसे हम स्लगिंग कहते हैं, सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हो गया है। लेकिन क्या यह उन लोगों के लिए सही है जिनकी त्वचा तैलीय है और जिन पर मुँहासे जल्दी निकलते हैं? और भारत की गर्मी और नमी वाली जलवायु में यह कितना असरदार है?

स्लगिंग असल में क्या है और यह वायरल क्यों हुआ?

स्लगिंग का मतलब है कि आप अपनी स्किनकेयर रूटीन का आखिरी स्टेप एक पतली परत से करते हैं जो नमी को अंदर लॉक कर देती है। यह नाम इसलिए पड़ा क्योंकि रात भर इसे लगाने के बाद सुबह चेहरा चमकदार और चिपचिपा दिखता है, जैसे किसी 'स्लग' (कीड़े) पर चमक हो। ध्यान देने वाली बात यह है कि स्लगिंग नमी को बढ़ाने का काम नहीं करती, बल्कि जो नमी आपकी त्वचा में पहले से है उसे बाहर जाने से रोकती है।

इसका सबसे पुराना और असरदार तरीका पेट्रोलैटम (Petrolatum) का इस्तेमाल करना है। जर्नल ऑफ द अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी में हुए एक अध्ययन के अनुसार, पेट्रोलैटम त्वचा से पानी की कमी (TEWL) को 98% तक कम कर सकता है। यह तरीका कोरियन ब्यूटी और इन्फ्लुएंसर्स के बीच बहुत मशहूर हुआ क्योंकि इससे सुबह के समय त्वचा तुरंत चमकदार और हाइड्रेटेड दिखने लगती है। लेकिन ट्रेंड्स अक्सर यह नहीं सोचते कि आपकी त्वचा का प्रकार क्या है या मौसम कैसा है।

क्या तैलीय और मुँहासे वाली त्वचा बिना ब्रेकआउट के स्लग कर सकती है?

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हाँ, लेकिन बहुत सावधानी से। स्लगिंग को हर रोज़ का रोज़ का काम नहीं बनाना चाहिए, बल्कि इसे तभी करना चाहिए जब आपकी त्वचा को थोड़ी राहत की ज़रूरत हो। पेट्रोलैटम खुद तो मुँहासे नहीं पैदा करता, लेकिन खतरा इसमें है कि यह क्या चीज़ें अंदर सील कर देता है। अगर रात भर पसीना, तेल, बचा हुआ प्रोडक्ट और मुँहासे पैदा करने वाले बैक्टीरिया अंदर फँस जाएँ, तो त्वचा में कंजेशन और ब्रेकआउट हो सकते हैं।

मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे शहरों में नमी बहुत ज़्यादा होती है, जिससे त्वचा पहले से ही गीली रहती है। ऐसे में भारी सील लगाने से त्वचा और भी पसीने से भर जाती है। इसके अलावा, भारतीय त्वचा (फिट्ज़पैट्रिक III–V) पर मुँहासे होने के बाद काले धब्बे (PIH) जल्दी पड़ जाते हैं, इसलिए हर फालतू ब्रेकआउट से बचना बहुत ज़रूरी है।

स्लगिंग कब आपकी त्वचा के बैरियर के लिए वाकई फायदेमंद है?

स्लगिंग को रोज़ाना का नहीं, बल्कि एक 'फर्स्ट-एड' की तरह समझें। जब आप एक्सफ़ोलिएशन या रेटिनोइड का इस्तेमाल करते हैं, तो त्वचा थोड़े समय के लिए संवेदनशील हो जाती है। उस समय हल्की सीलिंग करने से लिपिड मैट्रिक्स फिर से बनने में मदद मिलती है और पानी की कमी नहीं होती। यह प्रक्रिया बैरियर रिकवरी को तेज़ कर देती है क्योंकि मरम्मत के लिए त्वचा को लगातार हाइड्रेटेड रहना ज़रूरी है।

खासकर सर्दियों में, दिल्ली और चंडीगढ़ जैसे शहरों में त्वचा के सूखे हिस्से (गाल, नाक के आसपास) ज़्यादा फटने लगते हैं। ऐसे में पूरे चेहरे पर भारी क्रीम लगाने के बजाय सिर्फ उन हिस्सों पर हल्की सील लगाना बेहतर है।

हल्का विकल्प: स्नेल म्यूसिन (Snail Mucin) से सीलिंग करने का कोरियन तरीका

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पेट्रोलैटम के बजाय, आप स्नेल म्यूसिन (Snail Secretion Filtrate) का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह एक हल्का जेल है जो बैरियर को सहारा देता है और बिना भारीपन के नमी लॉक करता है।

स्नेल म्यूसिन में ग्लाइकोप्रोटीन, हयालूरोनिक एसिड और जिंक जैसे तत्व होते हैं जो पानी को पकड़ कर रखते हैं और सूजन को शांत करते हैं। यह त्वचा को हाइड्रेटेड रखता है और रोमछिद्रों को बंद होने से बचाता है।

कोरियन तरीके से स्लग करने के लिए: 1) डबल क्लीनज़ करें, 2) किसी अच्छे एक्टिव तत्व का इस्तेमाल करें, 3) गीली त्वचा पर स्नेल म्यूसिन लगाएँ, और 4) अंत में एक हल्का मॉइस्चराइज़र लगाएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. तैलीय और मुँहासे वाली त्वचा के लिए स्लगिंग अच्छी है या बुरी? सही तरीके से करने पर यह फायदेमंद हो सकती है, लेकिन भारी क्रीम से मुँहासे हो सकते हैं। हल्के विकल्प बेहतर हैं।

2. क्या स्लगिंग से पिंपल्स या रोम छिद्र बंद हो जाते हैं? हाँ, अगर आप तैलीय त्वचा पर भारी ऑक्लूसिव लगाती हैं और वह गंदगी को अंदर सील कर देता है।

3. क्या भारत की नमी वाली मौसम में स्लगिंग की जा सकती है? हाँ, लेकिन बहुत हल्के उत्पादों के साथ। भारी क्रीम से बचें।

4. तैलीय त्वचा के लिए क्या बेहतर है: पेट्रोलैटम या स्नेल म्यूसिन? तैलीय त्वचा के लिए स्नेल म्यूसिन ज़्यादा बेहतर है क्योंकि यह भारी नहीं है।

5. तैलीय त्वचा को कितनी बार स्लग करना चाहिए? महीने में एक या दो बार ही करें, रोज़ाना नहीं।

मुख्य बात: स्लगिंग को एक इलाज की तरह देखें, रोज़ाना का काम नहीं। हल्के उत्पादों का इस्तेमाल करें और अपनी त्वचा के हिसाब से ही रूटीन बनाएँ।

क्या आप अपनी त्वचा को नमी लॉक करने का एक हल्का और असरदार तरीका देना चाहते हैं? आज ही Quench Avocado Barrier Repair Moisturizer को आज़माएँ और देखें कि यह आपकी तैलीय और मुँहासे वाली त्वचा के लिए कैसे काम करता है।

बेहतर सीलिंग के लिए, आप हमारे Snail Mucin Collagen Boost Mask का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

अगर मुँहासों के बाद काले धब्बे रह जाते हैं, तो हमारे Dark Spot Correcting Ampoule with Cica Herb Repair से उन निशानों को कम करने में मदद मिल सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न क्या ऑयली स्किन वाली स्लगिंग कर सकती हैं

क्या ऑयली स्किन वाली लड़कियां स्लगिंग कर सकती हैं?

हां, ऑयली और एक्ने-प्रोन स्किन वाली लड़कियां स्लगिंग कर सकती हैं, लेकिन थोड़ी समझदारी के साथ। बहन, गाढ़ी पेट्रोलियम जेली पूरे चेहरे पर लगाने से पोर्स बंद हो सकते हैं और दाने बढ़ सकते हैं। बेहतर है कि स्लगिंग सिर्फ सूखे पैच पर करें या फिर हल्के विकल्प जैसे Quench Botanics का स्नेल म्यूसिन इस्तेमाल करें, जो बैरियर सील करता है पर भारी नहीं लगता। सर्दी में जब स्किन ज्यादा रूखी हो, तब यह तरीका सबसे अच्छा काम करता है।

स्लगिंग के लिए कौन सा मौसम सबसे अच्छा है?

स्लगिंग के लिए सर्दी (सर्दी) का मौसम सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि तब हवा रूखी होती है और स्किन की नमी जल्दी उड़ जाती है। ऐसे में रात को सील करने से स्किन का मॉइस्चर लॉक हो जाता है और सुबह चेहरा मुलायम लगता है। गर्मी और बारिश के उमस भरे मौसम में, खासकर मुंबई जैसी जगह, भारी स्लगिंग से पसीना और चिपचिपाहट बढ़ सकती है। ऐसे मौसम में Quench Botanics के हल्के स्नेल म्यूसिन से सीलिंग करना ज्यादा आरामदायक रहता है।

स्लगिंग को नीम या हल्दी जैसे आयुर्वेदिक उपचार के साथ कैसे करें?

स्लगिंग को आयुर्वेदिक स्किनकेयर के साथ करने के लिए पहले हल्के नीम या हल्दी वाले फेसवॉश से चेहरा साफ करें, फिर हाइड्रेटिंग सीरम लगाएं और सबसे आखिर में सीलिंग लेयर लगाएं। बहन, ध्यान रखें कि नीम और हल्दी जैसे एक्टिव इंग्रेडिएंट्स पहले स्किन में जज्ब हो जाने दें, उसके बाद ही ऊपर सीलिंग करें, वरना वे काम नहीं करेंगे। ऑयली स्किन के लिए भारी जेली की जगह Quench Botanics का स्नेल म्यूसिन इस्तेमाल करें ताकि स्किन सांस लेती रहे।

स्लगिंग के बाद सुबह क्या करना चाहिए?

स्लगिंग के बाद सुबह सबसे पहले एक हल्के फेसवॉश से रात की सीलिंग लेयर अच्छे से धो लें, ताकि पोर्स में कुछ जमा न रहे। इसके बाद टोनर लगाएं और दिन के लिए हल्का मॉइस्चराइजर तथा सनस्क्रीन जरूर लगाएं, खासकर अगर आप दिल्ली के प्रदूषण या तेज धूप में बाहर निकलती हैं। बहन, सुबह की सफाई इसलिए जरूरी है क्योंकि रातभर सील हुई स्किन पर बैक्टीरिया और तेल जमा हो सकता है, जिससे ऑयली स्किन पर दाने आने का खतरा रहता है।

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